भोपाल में आध्यात्म और राष्ट्रवाद का संगम — आचार्य श्री समयसागर जी के दर्शनार्थ पहुंचे RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत

सेवा, शिक्षा, स्वावलंबन और धर्म-संरक्षण पर हुई 1 घंटे तक गहन चर्चा, आचार्य विद्यासागर जी का भावपूर्ण स्मरण कर भावुक हुए भागवत जी

भोपाल |

धर्म नगरी भोपाल इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है, जहाँ वर्षायोग चातुर्मास कर रहे परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के पावन चरणों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुँच रहे हैं। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि इसी क्रम में एक ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षण तब आया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी आचार्य श्री के दर्शनार्थ चातुर्मास स्थल पर पधारे।
डॉ. भागवत जी ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और लगभग 1 घंटे तक आचार्य संघ के सान्निध्य में रहे। उन्होंने भोपाल में निर्माणाधीन भव्य पाषाण जिनालय का अवलोकन भी किया।
सेवा, स्वावलंबन और संस्कारों के प्रकल्पों पर हुई सार्थक चर्चा —
इस आध्यात्मिक संवाद में केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण से जुड़े गहन विषयों पर चर्चा हुई। आचार्य श्री द्वारा प्रेरित विभिन्न प्रकल्पों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ —

– दयोदय महा अभियान: गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास, जहाँ गौ-सेवा को स्वावलंबन से जोड़ा जा रहा है।
– हथकरघा और स्वावलंबन: हथकरघा केंद्रों के माध्यम से हजारों श्रमिक परिवारों को रोजगार और स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।
– प्रतिभास्थली: बेटियों को संस्कारयुक्त, स्वावलंबी और विदुषी बनाने वाला भारत का अद्वितीय शिक्षण संस्थान।
– आयुर्वेदिक चिकित्सा और जिनालय निर्माण: देशभर में बन रहे भव्य पाषाण जिनालय, आयुर्वेद चिकित्सालय के माध्यम से जीवदया, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।

डॉ. भागवत जी ने इन प्रकल्पों की मुक्त कंठ से सराहना की और कहा कि यह कार्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के कार्य हैं।
*जब भावुक हो उठे डॉ. मोहन भागवत — आचार्य विद्यासागर जी का स्मरण —
इस संवाद का सबसे भावुक क्षण तब आया जब डॉ. मोहन भागवत जी ने परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में गुरुवर के अंतिम दर्शन से जुड़ी अपनी स्मृतियाँ साझा कीं।
गुरुवर के त्याग, तपस्या, स्वदेशी चिंतन और करुणा को याद करते हुए वे भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा — “आचार्य विद्यासागर जी का जीवन केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत वर्ष के लिए त्याग और तपस्या की प्रेरणा है।”

संतों का सान्निध्य देता है नई दिशा —

यह भेंट इस बात का प्रमाण है कि भारत की संत परंपरा और राष्ट्रवादी विचारधारा एक ही दिशा में कार्य कर रही है — समाज में समरसता, स्वावलंबन और संस्कारों की स्थापना।

इस अवसर पर डॉ. भागवत जी का शाल, श्रीफल और तिलक लगाकर आत्मीय सम्मान किया गया।

इस पावन अवसर पर उपस्थित रहे —

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से — श्री अशोक जी पांडे, डॉ. राजेश जी सेठी, श्री सोमकांत जी उमालकर, श्री स्वप्निल जी कुलकर्णी, श्री विमल जी गुप्ता, श्री कैलाश जी लोवंशी, श्री संतोष मीणा सहित केंद्रीय, क्षेत्र एवं प्रदेश स्तर के वरिष्ठ अधिकारी।

जैन समाज की ओर से — श्री पंकज सुपारी (अध्यक्ष, भोपाल जैन समाज), श्री अखिलेश जैन (भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष), श्री विनोद बड़जात्या (अध्यक्ष, विद्यासागरोदय समाधि स्थल, डोंगरगढ़), डॉ. सावन जैन रेशु (दमोह), इंजी. गौरव जैन (निर्माण समिति सदस्य, कुंडलपुर एवं डोंगरगढ़), श्री राकेश जैन (प्रभारी निर्माण कमेटी), श्री देवेन्द्र जैन रुचि, श्री मनोज बांगा, श्री प्रमोद जैन सहित अनेक प्रमुख समाजसेवी उपस्थित थे।

निश्चित ही यह आध्यात्मिक भेंट भारतीय संस्कृति, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए एक प्रेरक प्रसंग बन गई है।

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