रविदास जी के समता और समानता के विचारों में निहित हैं वर्तमान लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें अर्जुन राम मेघवाल

hindustan samaj. योगेश कुमार सोनी( नई दिल्ली):
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ए.बी.आर.एस.एम.), दिल्ली प्रदेश द्वारा रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सभागार में “संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार श्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रविदास जी के राज्य संबंधी भावों और विचारों को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी साकार रूप प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अंत्योदय जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के सामान्य वर्ग की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समता और समानता भारतीय संविधान की मूल भावना है और इसके विचारों की गहरी प्रेरणा संत रविदास जी के दर्शन में दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों को स्थान दिया। श्री मेघवाल ने संत रविदास जी की वाणी और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने आचरण में चंदन के समान शीतलता, सद्भाव और सकारात्मकता धारण करनी चाहिए।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री हनुमान सिंह राठौड़, अध्यक्ष, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर तथा अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार नगावत, कुलपति, दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय, नई दिल्ली उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ तथा संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास जी पर केंद्रित लघु चलचित्रों का प्रदर्शन किया गया। मंचासीन अतिथियों द्वारा श्री हनुमान सिंह राठौड़ द्वारा लिखित पुस्तक ‘संत शिरोमणि सद्गुरु श्री रविदास’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक में संत रविदास जी के वैचारिक एवं व्यावहारिक पक्षों तथा उनके प्रेरणादायी सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है।

मुख्य वक्ता श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि वेद भारतीय भक्ति परंपरा के मूल स्रोत हैं और प्राचीन ज्ञान परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए संतों ने लोकभाषा में अपनी वाणियों को समाज तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि संतों ने कर्म के प्रति समाज में आस्था को पुनः स्थापित करते हुए सामाजिक समरसता की अलख जगाई। संत रविदास जी अपनी वाणी और सामाजिक कार्यों के माध्यम से सामाजिक समरसता के प्रतिमूर्ति के रूप में आज भी प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की जाति-संप्रदाय निरपेक्ष एवं सामाजिक समरसता पर आधारित दृष्टि आज के समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनके विचारों को व्यवहार में उतारकर समाज में समरसता और सद्भाव को और मजबूत किया जा सकता है।

अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार नगावत ने कहा कि संत रविदास जी सहित भारतीय संत परंपरा और भारतीय ज्ञान परंपरा के दर्शन से कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित आधुनिक तकनीकी विकास को भी मानवीय दिशा प्रदान की जा सकती है। उन्होंने बेहतर समाज के निर्माण के लिए संत रविदास जी के मूल्यों को अपनाने पर बल दिया।

प्रो. गीता भट्ट, निदेशक, एनसीडबल्यूईबी एवं अखिल भारतीय महामंत्री, ए.बी.आर.एस.एम. ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, शिक्षक और समाज के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने वर्ष 1988 से वर्तमान तक ए.बी.आर.एस.एम. की कार्यप्रणाली एवं संगठन के कार्य-विस्तार की जानकारी भी साझा की।

इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से अ. भा. संगठन मंत्री माननीय महेंद्र कपूर एवं महामंत्री प्रो. गीता भट्ट, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ( उच्च शिक्षा) प्रो. मनोज कुमार खन्ना, एवं महामंत्री डॉ. संगमेश, दिल्ली प्रदेश (विद्यालय शिक्षा) अध्यक्ष श्री राजेश कुमार पालीवाल, एवं महामंत्री डॉ. अजय कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में 600 से अधिक प्राचार्य, शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। अंत में प्रो. मनोज कुमार खन्ना द्वारा आभार ज्ञापन किया गया तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *