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सोन घड़ियाल सैंक्चुअरी में अंडे से निकले 132 बेबी एलिगेटर - Hindustan Samaj

सोन घड़ियाल सैंक्चुअरी में अंडे से निकले 132 बेबी एलिगेटर

ऐसी काटी गदर, मां के छूटे पसीने
2021 में अभ्यारण्य में खत्म हो गए थे घड़ियाल
Hindustan Samaj. सीधी.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित सोन घड़ियाल अभ्यारण जोगदह से एक शानदार खबर आई है. यहां 5 मादा घड़ियालों ने 132 बच्चों को जन्म दिया है. इससे न सिर्फ अभ्यारण क्षेत्र गुलजार हो उठा है बल्कि वन विभाग और स्थानीय लोगों में भी खुशी की लहर है. यह पहली बार है जब सोन घड़ियाल अभ्यारण में इतनी बड़ी संख्या में घड़ियालों के बच्चे जन्मे हैं. अब सोन घड़ियाल अभ्यारण अमला उनकी देखरेख और सुरक्षा-व्यवस्था में जुटा हुआ है.
इस अभ्यारण की स्थापना प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल के तहत वर्ष 1981 में की गई थी, जहां शुरू में मगर और घड़ियाल लाकर बसाए गए थे. शुरुआत में तो घड़ियालों और मगरमच्छों की संख्या में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई लेकिन फिर अचानक घड़ियालों की संख्या में गिरावट शुरू हो गई, जिसे नियंत्रित करना अभ्यारण्य के अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी.
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2021 में अभ्यारण्य में खत्म हो गए थे घड़ियाल
वर्ष 2021 में 2 नर घड़ियालों की मृत्यु के बाद यहां नर घड़ियालों की संख्या लगभग शून्य हो गई थी. फिर चंबल नदी से यहां नर घड़ियाल लाए गए और उनकी उचित देखभाल की गई, जिससे एक बार फिर सोन अभ्यारण्य घड़ियालों से आबाद हो गया. बता दें कि ये अभ्यारण्य सोन नदी, बनास नदी और गोपद नदी पर 210 किलोमीटर के रेंज में फैला हुआ है.
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जन्म के बाद केवल 2 फीसदी बच्चे रह पाते हैं जीवित
घड़ियालों के संरक्षण में कई चुनौतियां होती है और वही चुनौती सोन अभ्यारण्य में भी आ रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद केवल 2 प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह पाते हैं. हैचरी सुविधा (जहां कृत्रिम परिस्थितियों में अंडों से बच्चे निकाले जाते हैं) न होने से यह चुनौती और गंभीर हो जाती है. सोन घड़ियाल अभ्यारण में अभी हैचरी की सुविधा नहीं है, लेकिन विभाग ने इसे जल्द शुरू करने की योजना बनाई है, ताकि बच्चों की सुरक्षा और पालन-पोषण बेहतर तरीके से हो सके.
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एक नर घड़ियाल बह कर पहुंच गया है बिहार
सोन अभ्यारण्य में वर्तमान में 38 वयस्क घड़ियाल, 74 मगरमच्छ, 41 स्कीमर और 49 प्रजातियों के 4015 पक्षी दर्ज किए गए हैं. बच्चों को छोड़कर 38 घड़ियालों की संख्या दर्ज की गई है, क्योंकि कम उम्र में नर और मादा की पहचान कर पाना कठिन होता है. एक नर घड़ियाल जो पानी के बहाव में बिहार पहुंच गया था, अब तक वापस नहीं लाया जा सका है. जबकि उसकी लोकेशन ट्रेस की जा चुकी है. मध्य प्रदेश सरकार ने कई बार प्रयास किए, लेकिन बिहार सरकार से उसे वापस लाने की अनुमति नहीं मिली.
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आने वाले समय में अभ्यारण्य में बढ़ाई जाएगी संख्या
वन विभाग के डीएफओ राजेश कन्ना टी ने कहा कि “5 मादा घड़ियालों ने 132 बच्चों को जन्म दिया है जो अभ्यारण्य के लिए शुभ संकेत है. आने वाले समय में और नर घड़ियाल लाकर उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी और हैचरी की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे सोन घड़ियाल अभ्यारण्य देश में घड़ियाल संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन सके. इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.”

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