सेफर इंटरनेट-डे पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते जिलाधिकारी
दैनिक हिंदुस्तान समाज ब्यूरो मैनपुरी आर बी रघुवंशी
मैनपुरी – जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने भारत सरकार के इलैक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश के क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सेफर इंटरनेट-डे पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, पारंपरिक अपराधों की तुलना में इंटरनेट के माध्यम से किए जा रहे अपराधों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो कहीं अधिक गंभीर और जटिल होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति से मोबाइल स्क्रीन शेयर करना, ओ.टी.पी. साझा करना या व्यक्तिगत जानकारी देना अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकता है, जैसे ही कोई अज्ञात व्यक्ति इस प्रकार की मांग करे, तुरंत सतर्क हो जाएं और समझ लें कि यह धोखाधड़ी का प्रयास हो सकता है। उन्होंने कहा कि आजकल “ऑनलाइन अरेस्ट” या “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए प्रकार के अपराध सामने आ रहे हैं जिनमें अपराधी स्वयं को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं और उनसे धन की मांग करते हैं, चिंताजनक तथ्य यह है कि इन साइबर अपराधों के शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षित, पेशेवर, चिकित्सक और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति भी हो रहे हैं। उन्हांेने कहा कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण का एकमात्र प्रभावी उपाय जागरूकता है, जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति सतर्क और जागरूक नहीं होगा, तब तक इन अपराधों की रोकथाम संभव नहीं है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों से कहा कि जो भी जानकारी उन्हें इस बैठक में प्राप्त हुई है, उसे केवल अपने तक सीमित न रखें बल्कि अपने परिवार, सहकर्मियों एवं अन्य परिचितों तक भी पहुँचाएँ।
श्री सिंह ने कहा कि फोन कॉल्स, व्हाट्सएप कॉल्स, वॉयस कॉल्स पर तत्काल विश्वास न करें बल्कि अपने विवेक का प्रयोग करें, किसी के धमकी देने, प्रलोभन देने पर डरे नहीं, कोई भी सरकारी एजेंसी, बैंक आपको किसी प्रकार की गोपनीय जानकारी, लेन-देन के बारे में आपको फोन नहीं करेंगे, इस प्रकार के फोन सिर्फ डिजिटल अरेस्ट के लिए आते हैं, फोन कॉल्स आने पर आप घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको धमकी भरा कॉल करें या आपकोओ डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश करें तो आप साइबर क्राइम की ई-मेल आई.डी. अथवा 1930 पर शिकायत दर्ज करायें, कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या पैसों से सम्बन्धित मांग को पूरा न करें, अपने मोबाइल पर ऐप्स की नियमित जांच करें, अनावश्यक अनुमतियां रद्द करें और अनुपयोगी एप्स को हटा दें, सतर्क रहें कभी भी भुगतान प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन या ओटीपी, पिन साझा न करें ये स्कैम के तरीके हो सकते हैं, कोई सरकारी एजेंसी (पुलिस, सीबीआई, ईडी) वीडियो या वॉयस कॉल्स के माध्यम से आपकी जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा ने सेफर इंटरनेट-डे पर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, डिजिटल अरेस्ट के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इंटरनेट के खतरों जैसे साइबर बुलिंग, धोखाधड़ी और पहचान, मजबूत पासवर्ड, 02 स्तरीय सत्यापन और सुरक्षित ब्राउज़िंग की आवश्यकता, साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए सॉफ़्टवेयर अपडेट करने, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, एंटीवायरस का उपयोग करने जैसे उपाय बताए। उन्होने डिजिटल फुटप्रिंट और इंटरनेट पर की गई गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, ऑनलाइन खतरों की पहचान के लिए व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होने कार्यशाला में सफलतापूर्वक इंटरनेट को सुरक्षित रूप से उपयोग करने की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करते हुए कहा कि कॉल्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे ओ.टी.पी., आधार, पैन या बैंक विवरण, व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा न करें, अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखें, अनियंत्रित आधार भुगतान सूचनाआंे से सतर्क रहें, कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें जो केवाईसी अपडेट के बहाने आपकी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए निवेदन करें, उच्चलाभ के प्रति प्रेरित करने वाले ऑनलाइन निवेश ऑफरों से बचें।इस दौरान पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी दीपिका गुप्ता, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
दैनिक हिंदुस्तान समाज ब्यूरो मैनपुरी आर बी रघुवंशी
मैनपुरी – जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने भारत सरकार के इलैक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश के क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सेफर इंटरनेट-डे पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, पारंपरिक अपराधों की तुलना में इंटरनेट के माध्यम से किए जा रहे अपराधों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो कहीं अधिक गंभीर और जटिल होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति से मोबाइल स्क्रीन शेयर करना, ओ.टी.पी. साझा करना या व्यक्तिगत जानकारी देना अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकता है, जैसे ही कोई अज्ञात व्यक्ति इस प्रकार की मांग करे, तुरंत सतर्क हो जाएं और समझ लें कि यह धोखाधड़ी का प्रयास हो सकता है। उन्होंने कहा कि आजकल “ऑनलाइन अरेस्ट” या “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए प्रकार के अपराध सामने आ रहे हैं जिनमें अपराधी स्वयं को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं और उनसे धन की मांग करते हैं, चिंताजनक तथ्य यह है कि इन साइबर अपराधों के शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षित, पेशेवर, चिकित्सक और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति भी हो रहे हैं। उन्हांेने कहा कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण का एकमात्र प्रभावी उपाय जागरूकता है, जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति सतर्क और जागरूक नहीं होगा, तब तक इन अपराधों की रोकथाम संभव नहीं है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों से कहा कि जो भी जानकारी उन्हें इस बैठक में प्राप्त हुई है, उसे केवल अपने तक सीमित न रखें बल्कि अपने परिवार, सहकर्मियों एवं अन्य परिचितों तक भी पहुँचाएँ।
श्री सिंह ने कहा कि फोन कॉल्स, व्हाट्सएप कॉल्स, वॉयस कॉल्स पर तत्काल विश्वास न करें बल्कि अपने विवेक का प्रयोग करें, किसी के धमकी देने, प्रलोभन देने पर डरे नहीं, कोई भी सरकारी एजेंसी, बैंक आपको किसी प्रकार की गोपनीय जानकारी, लेन-देन के बारे में आपको फोन नहीं करेंगे, इस प्रकार के फोन सिर्फ डिजिटल अरेस्ट के लिए आते हैं, फोन कॉल्स आने पर आप घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपको धमकी भरा कॉल करें या आपकोओ डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश करें तो आप साइबर क्राइम की ई-मेल आई.डी. अथवा 1930 पर शिकायत दर्ज करायें, कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या पैसों से सम्बन्धित मांग को पूरा न करें, अपने मोबाइल पर ऐप्स की नियमित जांच करें, अनावश्यक अनुमतियां रद्द करें और अनुपयोगी एप्स को हटा दें, सतर्क रहें कभी भी भुगतान प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन या ओटीपी, पिन साझा न करें ये स्कैम के तरीके हो सकते हैं, कोई सरकारी एजेंसी (पुलिस, सीबीआई, ईडी) वीडियो या वॉयस कॉल्स के माध्यम से आपकी जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा ने सेफर इंटरनेट-डे पर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, डिजिटल अरेस्ट के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इंटरनेट के खतरों जैसे साइबर बुलिंग, धोखाधड़ी और पहचान, मजबूत पासवर्ड, 02 स्तरीय सत्यापन और सुरक्षित ब्राउज़िंग की आवश्यकता, साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए सॉफ़्टवेयर अपडेट करने, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, एंटीवायरस का उपयोग करने जैसे उपाय बताए। उन्होने डिजिटल फुटप्रिंट और इंटरनेट पर की गई गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, ऑनलाइन खतरों की पहचान के लिए व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होने कार्यशाला में सफलतापूर्वक इंटरनेट को सुरक्षित रूप से उपयोग करने की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करते हुए कहा कि कॉल्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे ओ.टी.पी., आधार, पैन या बैंक विवरण, व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा न करें, अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखें, अनियंत्रित आधार भुगतान सूचनाआंे से सतर्क रहें, कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें जो केवाईसी अपडेट के बहाने आपकी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए निवेदन करें, उच्चलाभ के प्रति प्रेरित करने वाले ऑनलाइन निवेश ऑफरों से बचें।इस दौरान पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी दीपिका गुप्ता, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
